जब तक दिन का उजाला था तब तक कोई नही आया और अब जब सांझ ढ़ल रही है तब आसमान में जब कोई हेलीकॉपटर दि…
जब तक दिन का उजाला था तब तक कोई नही आया और अब जब सांझ ढ़ल रही है तब आसमान में जब कोई हेलीकॉपटर दिख रहा है सब लोग छत पर लाल कपड़ा लेकर राहत सामग्री के लिए चिलाने लग रहे हैं | हेलिकॉप्टर किसी एक बिल्डिंग के ऊपर रूक कर समान गिरा रहा है और गर्दन डूबने वाले पानी में एक बिल्डिंग से दूसरे बिल्डिंग तक समान पहुंचाना नामुमकिन सा है | सरकारी तंत्र इस हद तक विफल है कि लोगों तक पीने के पानी तक नही है और मेरे आस पास के कई घरों से लोग पलायन कर गए हैं | सांझ ढ़लने के बाद पानी में फंसे जानवरों का रूदन भरी अवाज रूला देती है |
इन सब के बीच जब हम फोन ऑन कर रहे हैं शुभचिन्तकों का लगातार कॉल और मैसेज आ रहे हैं और वे पूछ रहे हैं कि हमें क्या चाहिए, सच कहें तो बस यही कमाया है जीवन में कि इस विपदा में लोग मदद के लिए स्वेच्छा से आगे आकर मदद के लिए पूछ रहे हैं | भगवान के कृपा से हम अब भी सुरक्षित है और थेथर हाइ लेवल के है, संघर्ष करते हुए हर पल और भी मज़बूत हो गए हैं |
मुमकिन हो तो अपने घर के छत से, खिड़की या बालकनी से आस पास के लोगों से हाल चाल पूछिए क्योंकि मदद कर पाए या ना कर पाए लेकिन दुख के घड़ी में हिम्मत देते रहने से जिंदगी जीने के लिए साहस मिलती रहती है |
नोट - ये तस्वीर बस एक तस्वीर है, ऐसी स्थिति मेरे घर के चारों तरफ की है |